डी.वि.जी – पार्श्वचित्र – हिंदी || DVG – Brief Profile – Hindi

डी वि गुंडप्पा अपने कलम नाम डी वि जी से जाने जाते हैं इनका जन्म १७ मार्च १8८७ को मूलबगाल के कोलर जिला में हुआ था ।

डी वि जी ने अपने जीवनकाल में अलग अलग भूमिकाएं निभाई हैं वो बाहरी दुनियां के लिए कभी पत्रकार , संपादक , कवी , जीवनी लेखक ,बौद्धिक ,साहित्यकार के नाम से भी जाने जाते थे , लेकिन वास्तव में वो एक दयालु ब्यक्ति थे जिनमे ईमानदारी थी जो की किसी भी समय के लिए एक स्वर्ण मानक है ।

डॉक्टर डी व् गन्दप्पा जी की सामन्य शिक्षा दसवीं तक हुयी थी लेकिन उन्होंने अपने आप को वेद , संस्कृत , कन्नडा , तेलगु , अंग्रेजी , शास्त्रीय संगीत , नृत्य ,स्वामी विवेका नन्द [F1] जी और कांग्रेस के अध्यक्ष के भाषण से परिचित कराया । वो जी.के. गोखले [F2] अवं उनके के विचारों के प्रति समर्पित थे।

  • संन १९०७ में उन्होंने समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखों का योगदान देना शुरू किया। उन्होंने ‘द प्रेस गैग’ को मैसूर समाचार पत्र विनियमन के खिलाफ प्रतिक्रियाएँसंकलित करने में मदद की (१९०७)।
  •  उन्होंने ‘द कर्नाटक’ , ‘एक द्वि-साप्ताहिक’, ‘इंडियन रिव्यू ऑफ़ रिव्यू’, पब्लिक अफेयर्स ’, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक अफेयर्स की पत्रिका शुरू की। उन्होंने कर्नाटक जन जीवन मट्टू अर्थशादका पत्रिका और कन्नड़ साहित्य परिषद [F3] की गृह पत्रिका के संचालन को स्थिर किया।
  • सर एम.विश्वेश्वरैया से परिचित होने के बाद उन्हें बैंगलोर नगर परिषद (1912) का सदस्य मनोनीत किया गया।
  • मूल राज्यों की समस्याओं के बारे में चिंतित, उन्होंने इस विषय पर कई प्रणाली प्रकाशित की। वे मैसूर (१९३९) और मैसूर विधान परिषद (1926-1940) में संवैधानिक सुधारों की समिति के सदस्य थे।
  • वे 1913 से मैसूर के प्रशासन से जुड़े थे, और उन लोगों के साथ जिन्होंने मैसूर में कांग्रेस शरुआत की थी।

वे एक उत्कृष्ट कन्नड़ साहित्यकार थे , उनकी रचनाओं के अंतर्गत अन्तःपुरा गीते [F4] , दार्शनिक कवितायेँ जैसे ‘मनकू थीममना कग्गा’ [F5], जीवनी और शेक्सपियर के ‘मैकबेथ’ और टेनिसन के ‘द कप’ के अनुवाद जैसे गीत शामिल हैं, जिनमें राजनीति, संस्कृति और धर्म पर निबंध हैं।

उन्होंने ५० से भी अधिक पुस्तकों और ८००००+ पृष्ठों के लेख लिखे हैं।

  • उनका अभूतपूर्व कार्य ‘मनकू थीममना कग्गा’ आज भी दैनिक आधार पर मनाया जाता है और ये हमेशा के लिए ऐसे ही जाना जायेगा है इसमें कोई दो मत नहीं है ।
  • ‘भगवद्गीता’ [F6] पर उनके व्याख्यान को ‘गीता तत्पराचार्य’ या ‘जीवनधर्म योग’ [F7] के रूप में संकलित किया गया है जिसे सं १९६७ में साहित्य अकादमी पुरस्कार [F8] मिला।
  • वे पम्पा भारत ’के संपादकों में से एक थे, जो एक महाकाव्य, कन्नड़ कविता और अंग्रेजी कन्नड़ शब्दकोष है। वे संस्कृत के विद्वान भी थे।
  • सं १९१५ में कन्नड़ साहित्य परिषद की स्थापना के साथ वे बाद में इसके उपाध्यक्ष भी बने, और परिषद् की गतिविधियों और प्रतिष्ठा को बढ़ाया।
  • उन्होंने ‘गोखले सेवा लीग’, ‘द मैसूर स्टेट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन’, ‘शॉर्टहैंड राइटर्स एसोसिएशन’, ‘सेल्फ प्रोटेक्शन लीग’ और ‘गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक अफेयर्स (जीआईपीए)’ [F9] की शुरआत की।

मैसूर विश्वविद्यालय ने उनको माननीय डी .लिटन की उपाधि से सं१९६१ में सम्मानित किया। [F10] । भारत सरकार से उन्हें सं १९७४ में पद्म भूषण से सम्मानित [F11] किया।

डीवीजी ने अपने पूरे जीवन में जिन गणमान्य व्यक्तियों के साथ जुड़े थे, उनसे कोई व्यक्तिगत उपकार नहीं लिया , उन्होंने एक बार जो सेवाएं प्रदान कीं, उस पर वे कभी घमंड नहीं किता उन्होंने रु। उन्हने एकत्र की गयी १००,००० राशि ,GIPA को दान में दे दी । उनकी अकादमी ने GIPA को नकद पुरस्कार दिए और अपने अधिकांश कार्यों का प्रतिलिपि अधिकार भी GIPA को प्रदान किया।

अक्टूबर १९७५ में डी वि.जी.जी जो की एक पत्रकार, राजनीतिक विचारक,साहित्यप्रेमी, ‘गोखले सार्वजनिक मामलों कi संस्थान’ और अन्य संस्थानके संस्थापक और आयोजक के नाम से जाने जाते थे , का निधन हो गया ।

इस लेख का उद्देश्य सिर्फ डीवीजी के व्यक्तित्व और उनके योगदान क्या हैं, इसकी रूपरेखा को बताना है।हमआप सभी को डीवीजी के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और हमें यकीन है कि उनका व्यक्तित्व या उसके काम आपको अवश्य ही प्रेरित करेंगे ।

लेख का मुख्य स्रोत भारतीय डाक और टेलीग्राफ विभाग,भारत सरकार द्वारा जारी की गयी सूचना फाइल्स से है

Translated / Authored By : Astha Mishra

Footnotes / References

[F1] Swami Vivekananda was an Indian Hindu monk, a chief disciple of the 19th-century Indian mystic Ramakrishna.He was a key figure in the introduction of the Indian philosophies of Vedanta and Yoga to the Western world and is credited with raising interfaith awareness, bringing Hinduism to the status of a major world religion during the late 19th century
[F2] G.K. Gokhale (Gopal Krishna Gokhale) was one of the political leaders and a social reformer during the Indian Independence Movement against the British Empire in India.
[F3] Kannada Sahitya Parishat is an Indian non-profit organisation that promotes the Kannada language. Its headquarters is in the city of Bengaluru in the state of Karnataka, India. It strives to promote Kannada language through publishing books, organising literary seminars and promoting research projects
[F4] Antahpura Gite are 60 Kannada poems penned by DVG  in 1950 after being mesmerised by the dexterous chisel of the stone sculptures at Belur,Karnataka
[F5] MankuThimmana Kagga is widely regarded as a masterpiece of Kannada literature
[F6] Bhagvadgita often referred to as the Gita, is a 700-verse Hindu scripture in Sanskrit that is part of the Hindu epic Mahabharata.
[F7] ‘Gita Tatparya’ or ‘Jivanadharma Yoga’ is a modern exposition of the meaning and significance of the Bhagavadgita 
[F8] Sahitya Akademi Award is a literary honor in India, which the Sahitya Akademi, India’s National Academy of Letters, annually confers on writers of the most outstanding books of literary merit published in any of the major Indian languages
[F9] The Gokhale Institute of Public Affairs is an independent, non-party and non communal organization endeavoring to serve as a center for the education of the public for democratic citizenship. It seeks to Co-operate with, and seeks Co-operation from the Government and all public institutions in the country.
[F10] Hon. D. Litton to be considered as Honorary Doctorate
[F11] Padma Bhushan is the third-highest civilian award in the Republic of India, preceded by the Bharat Ratna and the Padma Vibhushan and followed by the Padma Shri.
Main Source of the article is from Information Folder issued by Indian Posts & Telegraph Department, Government of India and footnotes/references are majorly sourced from Wiki

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